Wednesday, 21 November 2018

फूल


वो खुशबू की मेहक,
वो तितली की चहक,
भौंरा का वो गुनगुनाना,
चुपके से वो फूलों का खिल जाना!!

उमंग दिल में जागते हुऐ,
नये रंग बिखराते  हुऐ,
मुस्कान चेहरे पे लुटाते हुऐ,
सजते है जब.......,
साजन के हाथोँ से बालों में फूल!!

कभी कामयाबी का ज़रिया बनके,
तो कभी खुशियों का खज़ाना बनके,
हर खुशी को दुगुना कर देते है,
जब हर त्यौहार में सजते है फूल!!



कभी मोहब्बत का इज़हार बनके,
तो कभी आशिक के दिल का हाल बनके,
आशिकी को नये मुकाम पे लेजाते है फूल!!


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शादी का हार बनके गले में,
तो कभी जीत का इज़हार बन जाते है,
कभी डोली में लगते है तो,
कभी जनाज़े में साज़ जाते है,
ख़ुशी से लेके ग़म तक का सफर तय करते है फूल!!

जुदा होते है शाक़ से,
खोते है अपना वज़ूद,
औरों के चेहरे पे ख़ुशी देने के लिये,
जब हर दर्द भूल जाते है फूल!!

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