बचपन का वो ज़माना था,
रोज़ स्कूल हमें जाना था,
पढ़ने, लिखने के लिए,
किताबें हमें ले जाना था!!
पूरा दिन किताबों में गुज़ारते थे,
एक के बाद एक किताब निकालते थे,
रात भर पढ़ाई में लगा देते थे,
सुबह होते ही परीक्षा देने जाते थे!!
किताबें हर सफर में साथ होती थी,
कभी हसाती थी, तो कभी रुलाती थी किताबें,
नयी, पुरानी बातें सिखाती थी किताबें,
परियों की कहानियाँ सुनाती थी किताबें!!
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पकवान, कहानियाँ, मनोरंजन सब पढ़ जाते थे,
किताबघर में किताबों का खज़ाना होता था,
ख़ामोशी से सब को पढ़ते जाना होता था!!
ज़िन्दगी को आगे बढाती है,
अँधेरे में उजाला बन जाती है,
मूर्क को ज्ञाननी बनाती है,
जीवन का उद्धार कराती है किताबें!!
ज़िन्दगी से प्रेम करना सिखाती है किताबें,
महान लोगों की बातें बताती है किताबें,
टीचर, डॉक्टर, जैसे महान इंसान बनाती है किताबें,
एक अच्छे दोस्त की तरह दोस्ती निभाती है किताबें!!
खामोश रहकर भी बहुत कुछ कहती है किताबें,
दर्द-ऐ-दिल के अल्फ़ाज़ों को बयान करती है किताबें,
मोहबत से रहना सिखलाती है किताबें,
इन्सानियत का पैगाम दे जाती है किताबें!!
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